हम सभी के जीवन में ऐसे क्षण आते हैं जब हमें महसूस होता है कि कोई बहस होने वाली है। यह बहस किसी भी विषय पर हो सकती है—घर में परिवार के किसी सदस्य के साथ, दफ्तर में सहकर्मी के साथ, दोस्तों के बीच या फिर किसी अनजान व्यक्ति के साथ। कई बार, यह बहस छोटे मुद्दों से शुरू होती है लेकिन धीरे-धीरे एक बड़े विवाद का रूप ले सकती है। ऐसी स्थिति में सबसे बुद्धिमानी भरा कदम होता है—शांत रहना और बात को बदल देना। यह कला न केवल आपके मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाएगी, बल्कि आपके रिश्तों को भी मजबूत करेगी और जीवन को अधिक सुखद बनाएगी।
1. बहस से बचना क्यों जरूरी है?
i) मानसिक शांति बनी रहती है
जब आप किसी के साथ बहस करते हैं, तो यह आपके मन में नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न कर सकता है। तर्क-वितर्क से गुस्सा, तनाव और चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है। जब हम शांत रहते हैं और बहस को टालते हैं, तो हमारा मन स्थिर और संतुलित बना रहता है। इससे हमारी कार्यक्षमता भी बढ़ती है और हम बेहतर निर्णय ले सकते हैं।
ii) रिश्ते मजबूत होते हैं
बहस करने से रिश्तों में खटास आ सकती है। यदि आप हर छोटी बात पर तर्क करने लगते हैं, तो सामने वाला व्यक्ति धीरे-धीरे आपसे दूर होने लगता है। लेकिन यदि आप समझदारी दिखाते हुए बहस से बचते हैं और स्थिति को हल्के-फुल्के ढंग से संभालते हैं, तो रिश्ते लंबे समय तक मधुर बने रहते हैं।
iii) समय और ऊर्जा की बचत होती है
बहस में उलझने से समय और ऊर्जा दोनों की बर्बादी होती है। अक्सर, बहस से कोई ठोस समाधान नहीं निकलता, बल्कि केवल क्रोध और निराशा बढ़ती है। यदि हम समय रहते ही बहस को रोक दें और अपनी ऊर्जा को सकारात्मक कार्यों में लगाएं, तो हम अधिक उत्पादक हो सकते हैं।
iv) सकारात्मक माहौल बना रहता है
जहां बार-बार बहस होती है, वहां का माहौल नकारात्मक हो जाता है। चाहे वह घर हो, दफ्तर हो या कोई अन्य स्थान, बार-बार की बहस से वहां के लोगों का मूड खराब होता है और माहौल तनावपूर्ण बन जाता है। यदि हम बहस से बचते हैं, तो हम अपने आसपास सकारात्मक ऊर्जा बनाए रख सकते हैं।
2. बहस को टालने की कला कैसे सीखें?
i) धैर्य और आत्म-नियंत्रण बनाए रखें
बहस की स्थिति में सबसे जरूरी है कि आप अपने धैर्य को बनाए रखें। यदि कोई व्यक्ति गुस्से में बोल रहा है, तो तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय उसे शांत होने का मौका दें। आत्म-नियंत्रण रखना ही इस कला की पहली और सबसे महत्वपूर्ण शर्त है।
ii) बात को हल्के अंदाज में बदलें
जब लगे कि बहस होने वाली है, तो किसी मज़ाकिया या हल्के-फुल्के विषय की ओर बातचीत मोड़ने की कोशिश करें। उदाहरण के लिए, यदि घर में किसी मुद्दे पर बहस शुरू हो रही है, तो अचानक किसी पुराने मज़ेदार किस्से को याद करके माहौल को हल्का कर दें। इससे बहस की तीव्रता कम हो सकती है।
iii) शांतिपूर्ण भाषा का प्रयोग करें
कई बार बहस इसलिए बढ़ जाती है क्योंकि हम अपनी बात को गुस्से में या कटाक्ष भरे शब्दों में कह देते हैं। यदि आप देख रहे हैं कि मामला गर्म हो रहा है, तो अपनी भाषा को शांत और सौम्य रखें। इससे सामने वाला व्यक्ति भी उतनी ही शांति से जवाब देगा और बहस टल सकती है।
iv) सहमति जताने की कला सीखें
हमेशा अपनी बात को सही साबित करने की कोशिश न करें। कई बार यदि आप सामने वाले की बात से पूरी तरह सहमत नहीं हैं, तो भी “हां, आपकी बात में कुछ सच्चाई है” जैसे शब्द कहकर बहस को टाला जा सकता है। यह दिखाता है कि आप उनकी बात सुन रहे हैं और इससे माहौल शांत बना रहता है।
v) टॉपिक को बदल दें
अगर कोई विषय संवेदनशील है और बहस की संभावना है, तो तुरंत किसी और विषय पर बात करना शुरू कर दें। उदाहरण के लिए, यदि किसी राजनीतिक या धार्मिक विषय पर बहस छिड़ रही है, तो अचानक किसी नई फिल्म, यात्रा योजना, खेल या किसी अन्य हल्के विषय पर बातचीत शुरू करें।
vi) बहस करने वाले व्यक्ति से दूरी बनाए रखें
कुछ लोग स्वभाव से ही बहस करने में आनंद लेते हैं। यदि आप ऐसे व्यक्ति के साथ बातचीत कर रहे हैं और आपको लग रहा है कि वह बहस की ओर बढ़ रहा है, तो बेहतर होगा कि आप धीरे-धीरे दूरी बना लें।
3. बहस टालने के लाभ
i) मन की शांति बढ़ती है
जब आप बार-बार की बहस से बचते हैं, तो आपका मन स्थिर और शांत बना रहता है। इससे आपकी मानसिक सेहत अच्छी बनी रहती है और आप अधिक सुखद जीवन जी पाते हैं।
ii) रिश्ते अधिक मजबूत होते हैं
शांत रहने और बहस से बचने की आदत से आपके परिवार, दोस्तों और सहकर्मियों के साथ बेहतर संबंध बनते हैं। वे आपको एक समझदार और सौम्य व्यक्ति के रूप में देखते हैं और आपसे खुलकर बात करना पसंद करते हैं।
iii) नकारात्मकता कम होती है
जब हम हर छोटी बात पर बहस नहीं करते, तो हमारे भीतर की नकारात्मकता कम होती है। हम अधिक सकारात्मक सोचने लगते हैं और खुशहाल महसूस करते हैं।
iv) कार्यक्षमता बढ़ती है
जब आपका दिमाग तनाव और बहस से मुक्त होता है, तो आप अपने काम पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। इससे आपकी कार्यक्षमता में वृद्धि होती है और आप अधिक सफल हो सकते हैं।
4. निष्कर्ष
बहस करना कभी-कभी आवश्यक हो सकता है, लेकिन जब यह व्यर्थ और नकारात्मक ऊर्जा पैदा करने वाला हो, तब इसे टालना ही समझदारी होती है। शांत रहना और बात को बदल देना कोई कमजोरी नहीं, बल्कि एक बड़ी ताकत है। यह न केवल आपकी मानसिक शांति बनाए रखता है, बल्कि आपके रिश्तों को भी मधुर बनाता है।
इसलिए, अगली बार जब आपको लगे कि बहस होने वाली है, तो खुद को शांत रखें, गहरी सांस लें और किसी सकारात्मक या हल्के विषय की ओर बातचीत मोड़ दें। यह कला सीखकर आप अपने जीवन को अधिक सुखद, शांतिपूर्ण और आनंदमय बना सकते हैं।